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लम्बे समय से घुटने में दर्द रहना, कट कट आवाज आना
शरीर के सभी जोड़ों में दर्द होना, सूजन रहना
लम्बे समय से गर्दन में दर्द एवं अकड़न रहना
किसी एक पैर में कूल्हों से लेकर पैर के अंगूठे तक दर्द एवं खिंचाव रहना
लम्बे समय से एड़ी में दर्द एवं झनझनाहट रहना
कमर में दर्द एवं खिंचाव का रहना
लम्बे समय से घुटने में दर्द रहना, कट कट आवाज आना
शरीर के अंगों में कंपन महसूस होना
मांसपेशियों में खिचाव व कमर में दर्द।
हड्डी के ऊतकों में असाधारण वृद्धि ,हड्डियों का कमजोर होना।
कमर में निचले हिस्से में दर्द , आराम करने पर दर्द बढ़ना।
फेफड़े व शरीर के अन्य हिस्सों का संक्रमित होना ,उनमे घाव /फोड़ा होना।
हाथ /शरीर की ऊपरी त्वचा में गांठ होना ,दर्द होना।
आपके द्वारा दी गयी समस्त जानकारी पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी
आपकी दवाएं एक विशेष बॉक्स में रखकर आपके घर तक डिलीवर करायी जाएँगी
हड्डी सम्बन्धी रोगों का इलाज होमियोपैथी पद्धति में जड़ से होता है
इलाज के दौरान आप हमारी क्लिनिक पर भी आकर डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं एवं ऑनलाइन सलाह भी ले सकते हैं
नोट : आप हमारे डॉक्टर से क्लिनिक में आकर भी मिल सकते हैं एवं ऑनलाइन सलाह भी ले सकते हैं
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Read Moreऑस्टिओआर्थरिटिस (Osteoarthtis) के लक्षण, कारण एवं इसका इलाज -
ऑस्टिओआर्थरिटिस एक ऐसी समस्या है, जिसमे हड्डियों में मौजूद टिश्यू /ऊतको में कार्टिलेज व सिनोवियल फ्लूइड कम होने लगता है जिससे हड्डियां अपना लचीलापन खोने लगती है फलस्वरूप मरीज़ को जोड़ो में दर्द, अकड़न व सूजन की समस्या होने लगती है। गंभीर स्थिति में यह मरीज़ को चलने उठने बैठने में असमर्थ बना देती है।

यह समस्या सामान्य तौर पर बढ़ती उम्र में देखने को मिलती है लेकिन ख़राब जीवनशैली व कार्य पद्धति (लम्बे समय तक खड़े रहना, भारी वजन उठाना, लम्बे समय तक बैठकर काम करना आदि ) के कारण अब यह समस्या युवाओं में भी देखने को मिल रही है।
आखिर ऑस्टिओआर्थरिटिस (Osteoarthtis) क्या है, आइये विस्तार से समझते हैं -
हड्डियों के जोड़ो में लचीलापन बनाए रखने के लिए एक प्रोटेक्टिव टिश्यू होता है, जिसे कार्टिलेज कहते है। कार्टिलेज मजबूत व लचीला होता है जो हड्डियों को आपस में जोड़ने का काम करता है जब हड्डियों के जोड़ो में मौजूद कार्टिलेज किसी कारण से टूटने/क्रैक या घिसने लगता है, तो हड्डियाँ आपस में रगड़ने लगती है जिससे कारण मरीज़ को जोड़ो में दर्द, अकड़न व सूजन महसूस होने लगती है। गंभीर स्थिति में यह मरीज़ को चलने उठने बैठने में असमर्थ बना देती है। यह मुख्य रूप से घुटने व कमर के निचले हिस्से पहले अपनी चपेट में लेता है इसके अतिरिक्त हाथ, अँगुलियों, कंधे, कूल्हों, रीढ़ व गर्दन के निचले हिस्से को प्रभावित करता है।

आइये समझते हैं ऑस्टिओआर्थरिटिस (Osteoarthtis) शरीर को किस प्रकार प्रभावित करता है?
यह समस्या धीरे -धीरे कई चरणों में बढ़ती है, सामान्यतः शरीर स्वयं अपनी क्षतिग्रस्तता को रिपेयर कर लेता है लेकिन कार्टिलेज में रक्त कोशिकायें न होने के कारण यह स्वयं को रिपेयर नहीं कर पाता है। जिसके कारण यह समस्या दिन -प्रतिदिन बढ़ती जाती है और गंभीर रूप ले लेती है। जिससे मरीज़ को जोड़ो के मूवमेंट पर कट -कट की आवाज सुनाई देती है और चलने -उठने -बैठने में तकलीफ होती है। ज्यादातर सुबह और शाम को जोड़ो में होने वाला दर्द बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त बैठकर उठने या चलने के बाद बैठने में बहुत तकलीफ होती है और सूजन व लालपन की समस्या हो जाती है।
आइये देखते है ऑस्टिओआर्थरिटिस (Osteoarthtis) के विभिन्न चरण -
स्टेज 1 - इसमें व्यक्ति को सामान्य दर्द महसूस होता है, और मरीज़ को हड्डियों में असमान्य उभार / विकास दिखाई देता है।
स्टेज 2 - इसमें मरीज़ को हड्डियों में उभार अधिक महसूस होता है, हालांकि इसमें मरीज़ की कार्टिलेज और सिनोवियल फ्लूइड प्रभावित नहीं होती है, लेकिन ज्यादा चलने फिरने या काम करने पर दर्द बढ़ जाता है।

स्टेज 3 -इस स्टेज में कार्टिलेज प्रभावित होकर घिसने या क्रैक होने लगती है जिससे मरीज़ को झुकने, चलने, उठने बैठने में बहुत अकड़न व दर्द महसूस होता है व जोड़ो में सूजन एवं लालपन की शिकायत होने लगती है।
स्टेज 3 - यह स्थिति अत्यंत गंभीर होती है, जिसमे मरीज़ की हड्डियों में मौजूद कार्टिलेज व सिनोवियल फ्लूइड खत्म होने लगता है, व हड्डियां अपना लचीलापन खो देती है, जिसके फलस्वरूप मरीज़ को जोड़ो के मूवमेंट में असहनीय पीड़ा होता है व चलने फिरने में मरीज़ असमर्थ हो जाता है।
आइये ऑस्टिओआर्थरिटिस (Osteoarthtis) के लक्षणो को देखें -
ऑस्टिओआर्थरिटिस (Osteoarthtis) होने के कारण -
ऑस्टिओआर्थरिटिस (Osteoarthtis) के इलाज हेतु बताई जाने वाली प्रमुख जांचें इस प्रकार हैं -
ऑस्टिओआर्थरिटिस (Osteoarthtis) से बचाव के उपाय -
ऑस्टिओआर्थरिटिस हेतु कुछ महत्वपूर्ण उपाय -
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Wrist Strech |
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Hemstring strech |
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Bridge pose |
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Cross knee |
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Leg movement |
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Trikodasana |
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Leg streching |
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Left leg raise |
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Shoulder strech |